बदलता इतिहास
अरमानों को दिल में दबायें, अपने बेजान हाथों से, चमत्कार करती हुई,
यह उज्ज्वला अपने ख़्वाबों के पर बुनती हुई ,
दिल में हैं आकांक्षाएँ, फिर भी सहमी सी खड़ी है ,
न जाने, यह पहेली की कौन सी कड़ी है?
किस जंजीर की इसके पैरों में जकड़ है,
चुनौतियों का भय या ज़माने की अकड़ है?
जो गौरैया सी चहकती, आज अंदर ही सिसकियाँ भर रही,
जो उड़ने को बेताब थी, आज आंख उठाने से भी डर रही ,
यह कैसी विषमता यह कैसा अन्याय?
वह बीच रास्ते में खड़ी है, होकर असहाय ,
अरे! यह तो आदर्शों की नौका है ,
इन मजबूत कदमों को किसने चलने से रोका है ?
इन विपत्तियों में, अब उसे और नहीं फसना है ,
ईश्वर की अद्भुत रचना को आज नया इतिहास रचना है ,
आज नया इतिहास रचना है।।
*Tried something different after a long long time…inspired by pen sketch by https://www.substack.com/@poojathakur


Well written!! 👏👏
Nice 👍 , Lines are unique reflects your inner soul thoughts